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सिद्धार्थनगर में ‘लूटतंत्र’ हावी: DM का आदेश डस्टबिन में, करोड़ों डकारने वाले पंचायत सिंडिकेट को किसका संरक्षण?

अंधेर नगरी, चौपट राजा: 5 दिन बाद भी नहीं बनी जांच टीम, क्या घोटालेबाजों को सबूत मिटाने का मौका दे रहा प्रशासन?

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार की ‘सिद्धार्थ’ नगरी: करोड़ों का पंचायत घोटाला दबाने में जुटा तंत्र, DM के आदेश को DPRO ने दिखाया ठेंगा!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • भ्रष्टाचार की ‘सिद्धार्थ’ नगरी: कागजों पर जलीं ₹3800 की लाइटें, धरातल पर अंधेरा; DPRO दफ्तर में फाइलें कैद!
  • DM के निर्देश को DPRO ने दिखाया ठेंगा! करोड़ों के पंचायत घोटाले की जांच ठंडे बस्ते में।
  • साहब! यह जांच में देरी है या घोटाले को दबाने की साजिश? 5 दिन बीते, नतीजा सिफर।
  • सिद्धार्थनगर पंचायत घोटाला: फर्जी बिलों से सरकारी खजाने में डकैती, जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति?
  • कमीशन का खेल या सिस्टम का फेल? ₹600 की लाइट ₹3800 में खरीदकर चमकाई जा रही प्रधानों की किस्मत।
  • बिना टेंडर ‘बंदरबांट’: SK और RK ट्रेडर्स पर मेहरबानी, जांच टीम के इंतजार में दम तोड़ते साक्ष्य।
  • छह पंचायतों की कुंडली तैयार, पर ‘कुंभकर्णी’ नींद में सिद्धार्थनगर का पंचायती राज विभाग।

सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करती है, वहीं सिद्धार्थनगर जनपद के नौगढ़ और शोहरतगढ़ विकासखंड में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि यहाँ जिलाधिकारी के आदेश भी फाइलों में दम तोड़ रहे हैं। छह ग्राम पंचायतों में हुए करोड़ों के कथित घोटाले की फाइल पांच दिनों से धूल फांक रही है, लेकिन अब तक जांच टीम का गठन न होना प्रशासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

DM का आदेश, फिर भी ‘साहब’ खामोश!

बीती 29 अप्रैल को शिकायतकर्ता अंकित सिंह ने नोटरी शपथ पत्र और पुख्ता साक्ष्यों के साथ जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन को करोड़ों की लूट की कुंडली सौंपी थी। जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए तत्काल जिला पंचायती राज अधिकारी (DPRO) को तीन सदस्यीय टीम गठित कर भौतिक सत्यापन के निर्देश दिए थे। लेकिन ताज्जुब की बात है कि 5 दिन बीत जाने के बाद भी ‘जांच’ कछुआ गति से भी आगे नहीं बढ़ी है। सवाल यह है कि आखिर इस देरी के पीछे किसका संरक्षण है? क्या भ्रष्टाचारियों को साक्ष्य मिटाने का समय दिया जा रहा है?

लूट का मॉडल: ₹600 की लाइट ₹3800 में!

पंचायत के बजट को किस बेरहमी से बंदरबांट किया गया है, इसकी बानगी ग्राम पंचायत रामगढ़ में दिखती है। यहाँ एक स्ट्रीट लाइट की कीमत ₹3,871 दिखाई गई है, जबकि बाजार में इसकी असल कीमत ₹600 से ₹1200 के बीच है। यही हाल हरदासपुर का है, जहाँ 50 लाइटों के नाम पर ₹1.77 लाख डकार लिए गए। टेड़िया ग्राम पंचायत में तो हद ही हो गई; यहाँ ईंट, सफाई और लाइट के नाम पर कागजों में लाखों खर्च हो गए, लेकिन धरातल पर धूल उड़ रही है।

फर्जी फर्मों का खेल: बिना टेंडर ‘अपनों’ पर मेहरबानी

आरोपों के घेरे में SK Traders और RK Traders नामक फर्में हैं, जिनके माध्यम से बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान किया गया। सूत्रों की मानें तो यह महज एक संयोग नहीं, बल्कि अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच का एक संगठित सिंडिकेट है जो वर्ष 2022 से लगातार सरकारी खजाने में सेंध लगा रहा है।

“जब साक्ष्य सामने हैं, शिकायत शपथ पत्र पर है और जिलाधिकारी का आदेश स्पष्ट है, तो फिर DPRO कार्यालय फाइल दबाकर क्यों बैठा है? क्या सिद्धार्थनगर में लोकतंत्र की जगह ‘लूटतंत्र’ हावी हो चुका है?”

मुख्य बिंदु: लूट की फेहरिस्त

  • 6 पंचायतें निशाने पर: रामगढ़, हरदासपुर, टेड़िया, सेमरियाव, रसूलपुर और रामपुर।
  • गायब अभिलेख: टेड़िया पंचायत में ₹20 लाख का ट्रांजेक्शन पोर्टल पर दर्ज है, लेकिन रिकॉर्ड गायब हैं।
  • फर्जी भुगतान: जनवरी से अगस्त के बीच बिना किसी कार्य के लाखों का भुगतान।

निष्कर्ष: सिद्धार्थनगर की जनता अब जवाब चाहती है। यदि अगले 24 घंटों में जांच टीम धरातल पर नहीं उतरी, तो यह साफ हो जाएगा कि भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में ऊपर से नीचे तक सबने हाथ धोए हैं। शासन को चाहिए कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और ‘फाइल दबाने’ वाले अधिकारियों पर भी नकेल कसे।

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